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गोरखपुर में युवाओं ने मनाया अनोखा नवरात्र, किया साक्षात देवी पूजन; हर कोई हुआ नतमस्तक

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: आज से देश भर में शारदीय नवरात्र की शुरूआत हो गयी। समूचे देश में आज के दिन लोगों ने मंदिरों में जाकर देवी माँ की पूजा अर्चना की। कई घरों में व्रतियों ने कलश स्थापना कर देवी माँ का स्वागत किया। वहीँ महानगर के कुछ युवाओं ने वो काम किया जिसकी ना केवल हर ओर चर्चा हो रही है बल्कि जो भी इन जिंदादिल युवाओं के इस निस्वार्थ भाव से किये गए कार्य को सुना, नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सका।

जी हाँ हम बात कर रहे हैं महानगर सहित कई शहरों में सक्रिय एनजीओ स्माइल रोटी बैंक के युवाओं की। ऐसे दिन जब देश भर में लोग मंदिरों, पूजा पांडालों के सामने सर नवाने का कोई मौका नहीं छोड़ते, उस वक़्त ये जिंदादिल नौजवान कुछ अलग कर गुजरने की दिल में तमन्ना लेकर वो कर गुजरे जिसका आने वाली पीढ़ियां निश्चित रूप से अनुकरण करेगी।

स्माइल रोटी बैंक के संस्थापक आज़ाद पांडेय और उनके साथियों ने इस शारदीय नवरात्र के पहले दिन का स्वागत मंदिरों और पंडालों में केवल सर नवा कर औपचारिकता मात्र से नहीं, बल्कि साक्षात् देवियों का पूजन कर मनाने योजना बनाई थी। उन्होंने ऐसा किया भी।

स्माइल रोटी बैंक के युवाओं ने आज अपने इस अभियान की शुरुआत रेलवे स्टेशन से की। जहाँ इधर-उधर घूम कर जानवरों की तरह जिंदगी व्यतीत कर रहीं दो विछिप्त अवस्था वाली महिलाओं को अपनी वैन से स्माईल होम ले आई। दोनों महिलाओं को बाकायदा स्नान कराया गया। साफ कपड़े पहनाए गए।

अपने इस अनूठे अभियान के बारे में बताते हुए स्माइल रोटी बैंक के संस्थापक आज़ाद पांडेय ने Gorakhpur Final Report से बात करते हुए कहा कि आज सम्पूर्ण भारतवर्ष में पवित्र नवरात्र का महापर्व अदभुद हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। घरों, मंदिरों, पूजा पांडालों चौतरफ़ा माँ के जयकारे दिन भर घण्टों और नालों के साथ गूँजते रहे। करोणों की संख्या में लोग आज व्रत भी हैं, माँ की उपासना कर खुद के लिए सुख, शान्ति, धन- धान्य माँगने हेतु।

उन्होंने कहा कि माँ की आराधना हेतु असंख्य पांडाल सज के इंतजार में पलकें बिछाए बैठे हैं, कि देवी माँ का आगमन जल्द से जल्द हो। जगराते के भक्तिमय संगीत लहरियों की गूँज आज रात से ही हर तरफ गूँजते हुए पाप के नाश में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी। कन्याएँ भी तैयार बैठी हैं कि इस बार उनके भीतर की देवी को लोग पूजन कर उनकी महत्ता को स्वीकार करेंगे

उन्होंने कहा कि इन सबके बीच तमाम चलती फिरती नारी रूपी देवी माँ मानसिक विछिप्तता की हालत में इस सम्पूर्ण देवीपूजन महोत्सव को मुँह चिढ़ा रही हैं। एक तरफ अरबों की लागत के पांडाल तो दूसरी तरफ नालियों के किनारे पशुवत जीवन गुजार रहीं ये माताएँ।

आज़ाद ने कहा कि ऐसे में स्माईल रोटी बैंक ने निर्णय लिया कि मंदिरों में भी जयकारे लगाएंगे, जगराते में भी नाचेंगे गाएंगे, पांडालों में भी माँ के आगमन पर अबीर गुलाल उड़ाएँगे। पर इन नालियों के किनारे सड़ती वर्षों से गन्दी, बदबू करती, अर्धनग्न माताओं को भी स्नान कराएंगे, कपड़े पहनाएँगे, इत्र लगाएँगे, कंघी करेंगे और इन चलती फिरती माताओं के चेहरे पे स्माईल लाकर इस सम्पूर्ण भक्तिमय नवरात्र में अपनी अनोखी पूजा से माँ भगवती के श्री चरणों मे नमन, अभिनंदन अर्पित कर खुद के लिए , समाज के लिए और समाज के आखिरी पायदान पे खड़े मनुष्य के लिए आरोग्य, सौभाग्य और वैभव माँगेंगे।

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