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गोरखपुर उपचुनाव: उपेंद्र, धर्मेंद्र, हरी प्रकाश सभी रेस में पिछड़े, अब ये तेज तर्रार नेता हो सकते हैं BJP प्रत्याशी

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: सदर लोक सभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को लेकर शुक्रवार को अफवाहों का बाजार पूरी तरह गर्म रहा। जहाँ अब तक रेस में सबसे आगे चल रहे क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र शुक्ला का नाम पीछे चला गया तो वहीँ डॉ धर्मेंद्र सिंह का नाम दौड़ में आगे आ गया। शुक्रवार दोपहर होते-होते एक नया नाम वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रकाश मिश्र का सामने आ गया।

इस बात को और बल तब मिल गया जब श्री मिश्रा को शुक्रवार को तुरंत गोरखपुर से लखनऊ बुलाया गया। ऐसी उम्मीद की जाने लगी श्री मिश्रा ही पार्टी के उम्मीदवार होंगे। कई मीडिया संस्थानों ने तो बाकायदा यह घोषणा कर दी की श्री मिश्रा ही भाजपा के प्रत्याशी होंगे। सोशल मीडिया पर तो इन्हे प्रत्याशी बना ही दिया गया।

लेकिन सूत्रों के अनुसार सदर लोक सभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार ना ही तो उपेंद्र शुक्ला होंगे, ना ही डॉ धर्मेंद्र सिंह या हरी प्रकाश मिश्रा। बल्कि एक नया अप्रत्याशित नाम जो सामने आया है वो है महानगर के ही एक और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक शुक्ला का। जानकारी के अनुसार अशोक शुक्ला के नाम पर सहमति बन चुकी है और आज शाम तक उनके प्रत्यशिता की घोषणा भी हो जाएगी।

भाजपा के अधिवक्ता प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक शुक्ला सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के बहुत करीबी हैं। पूर्वांचल के बड़े क्रिमिनल वकीलों में से एक श्री शुक्ला ही योगी के सभी मामले देखते हैं। पार्टी सूत्र के अनुसार श्री शुक्ला सदर लोक सभा सीट पर सारे समीकरणों में फिट बैठते हैं।

जनसंघ के समय से ही पार्टी से जुड़े श्री शुक्ला पार्टी के वरिष्ठ नेता रमापति राम त्रिपाठी के समधी हैं। इसके अतिरिक्त श्री शुक्ला केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के भी बहुत करीबी माने जाते हैं। जानकारी के अनुसार अशोक शुक्ला के नाम पर योगी ने भी सहमति जता दी है। गौरतलब है कि योगी इस सीट पर लगातार 1998 से लेकर 2014 तक सांसद रहे। योगी के प्रभाव वाली इस सीट पर उनकी अनदेखी करना केंद्रीय नेतृत्व के असंभव ही है।

अशोक शुक्ला चूँकि संगठन के पुराने नेता हैं इसलिए उनको जीताने के लिए पार्टी का हर कार्यकर्त्ता पूरी तरह से समर्पित भी होगा। हालांकि एक बात तो तय हैं कि अशोक शुक्ला उन नेताओं में से नहीं होंगे जिन्हे जैसे चाहे उठाया या बैठाया जा सकता है। काफी तेज तर्रार माने जाने वाले अशोक शुक्ला का अपना भी एक कद है जिसे निश्चित तौर पर वह आगे भी बरक़रार रखना चाहेंगे।

 

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