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वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज: निर्माणधीन कुश्ती हाल पत्तो की तरह बिखरा

वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज

गोरखपुर: स्थानीय वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज में निर्माणाधीन तीन मैट वाले प्रदेश के पहले कुश्ती हाल की छत ढलाई के दौरान ही गिर गई। छह के ऊपर काम कर रहे 50 मजदूरों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम करा रहा है। निर्माण एजेंसी प्रथम दृष्टया इसे डिजाइन में गड़बड़ी का मामला मान रही है। स्पोर्ट्स कालेज के प्राचार्य अरुणेंद्र पांडेय ने मौके पर पहुंचने के बाद खेल निदेशालय को घटना की जानकारी दे दी है।

बता दें कि वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज में 5.1636 करोड़ रुपये की लागत से कुश्ती हाल का निर्माण किया जा रहा है। मार्च 2016 में निर्माण शुरू हुआ था और इसे अप्रैल 2017 में पूरा करना था। लेकिन लक्ष्य से 10 महीने अधिक बीत जाने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। कल कुश्ती हाल की छत की ढलाई चल रही थी। करीब 50 मजदूर ढलाई के काम में लगे थे। शाम करीब साढ़े चार बजे के करीब छत अचानक सरकने लगी। इससे मजदूरों में भगदड़ मच गई।

उन्होंने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। इस बीच छत भरभराकर गिर गई। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। छत को लोहे की पाइप के सहारे ढाला जा रहा था। छत गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। घटना के बाद निर्माण एजेंसी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक एके शुक्ल मौके पर पहुंचे। शाम करीब सवा पांच बजे स्पोर्ट्स कालेज के प्राचार्य अरुणेंद्र पांडेय भी पहुंच गए और निरीक्षण किया। मौके से ही उन्होंने खेल निदेशालय को घटना की जानकारी दी।

वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कालेज में निर्माणाधीन कुश्ती हाल की ध्वस्त छत लखनऊ की फर्म ने लगाया था।लखनऊ की एक फर्म ने कुश्ती हाल के लिए ट्रस और डेकशीट लगायी थी। ट्रस के सहारे ही छत लगनी थी। इसे लोहे के पाइप के सहारे बनाया जाता है। छह गिरने के बाद जगह-जगह जोड़ से पाइप टूटे दिख रहे थे। ट्रस के ऊपर लगी डेकशीट (लोहे की शीट) के ऊपर कंक्रीट की पतली परत बिछायी जा रही थी। माना जा रहा है कि ट्रस की डिजाइन गलत होने के कारण छत पूरी तरह से गिर गई।

घटना की करायी जाएगी जांच : एके शुक्ल

निर्माण एजेंसी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के अपर परियोजना निदेशक एके शुक्ल ने बताया कि डिजाइन गड़बड़ होने के कारण यह घटना हुई है। इसे छत की ढलाई नहीं कह सकते। इसमें लोहे की शीट पर बहुत पतली कंक्रीट बिछायी जाती है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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