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राज्यसभा चुनाव: बीजेपी को वोट देना पड़ा महंगा, विधायक विजय मिश्रा निषाद पार्टी से बाहर

गोरखपुर: राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में वोट करना निषाद पार्टी के विधायक विजय मिश्रा को महंगा पड़ गया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। विजय मिश्रा ज्ञानपुर से निषाद पार्टी से विधायक हैं। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव द्वारा टिकट काटे जाने के बाद निषाद पार्टी के सिम्बल पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

डॉ संजय निषाद ने आज गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में मीडिया को बताया कि विजय मिश्रा को जब सभी राजनीतिक दलों ने धक्के मार कर बाहर कर दिया था, तब निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल ने अपने पार्टी का टिकट देकर सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों की कड़ी मेहनत व ईमानदारी से ज्ञानपुर के मतदाताओं ने चुनाव जीता कर विधानसभा में भेजा था।

उन्होंने कहा कि विजय मिश्रा के इस तरह के पार्टी विरोधी गतिविधियों पर समय आने पर मतदाता व पार्टी के कार्यकर्ता माकूल जवाब देंगे।उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी के दिशा निर्देश के खिलाफ जाकर मतदान करने के बाद पार्टी ने उनकी सदस्यता रद्द करने का फैसला किया है,साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को विधानसभा से सदस्यता समाप्त करने हेतु पत्र भेजा जाएगा।

डॉ संजय निषाद ने कहा कि निषाद पार्टी गरीबों शोषितों वंचितों निर्बलों की लड़ाई के लिए बनी है,हमेशा इसी उद्देश्य से कार्य करती रहेगी। बीजेपी पूंजीवाद, सामंतवादी विचारधारा के लोगों की पार्टी है, उसके साथ विधायक का हाथ मिलाना पार्टी के सिद्धांतों के विरुद्ध है इसका जवाब जनता समय आने पर देगी।

बता दें कि विधायक विजय मिश्रा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के साथ-साथ वर्तमान मंत्री भाजपा के नंद गोपाल नंदी पर रिमोट बम से हमला करने का आरोप भी है। इसके बावजूद उन्होंने अखिलेश के खिलाफ राज्यसभा चुनाव में मोर्चा खोलकर भाजपा को वोट दे दिया। जबकि निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के मंझले बेटे इं. प्रवीण निषाद को अखिलेश ने लोकसभा उपचुनाव में गोरखपुर से टिकट सपा से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा और उन्होंने लगातार 5 बार से जीत दर्ज करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट को 22 हजार वोटों से जीतकर सपा की झोली में डाल दिया।

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