जनता कैसे खोलेगी बस की इमरजेंसी विंडो, जब परिवहन मंत्री ही नहीं खोल पाए

गोरखपुर: सरकार चाहे दावे जितने कर ले, लेकिन उत्‍तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों का हाल किसी से भी छिपा नही है। हद तो तब हो गयी जब गोरखपुर पहुंचे प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री स्‍वतंत्रदेव सिंह रेलवे बस स्‍टेशन पर निरीक्षण के दौरान विभागीय बस की आपातकालीन खिड़की नहीं खोल सके। अंत में जब थक-हारकर उन्‍होंने बस के परिचालक को बुलाया, तो वह भी आपातकालीन खिड़की खोलने में सफल नहीं हुआ।

बात करें तो उत्‍तर प्रदेश की बीजेपी सरकार के परिवहन मंत्री स्‍वतंत्र देव सिंह गोरखपुर पहुंचे। जहाँ उनका कार्यक्रम जिला मुख्यालय के तीनों बस अड्डों का निरीक्षण के था। इसी के तहत उन्‍होंने गोरखपुर के रेलवे बस स्‍टेशन का औचक निरीक्षण किया।इस दौरान वह गोरखपुर से महराजगंज जाने वाली उत्‍तर प्रदेश परिवहन निगम की बस का निरीक्षण करने के लिए खटारा बस में चढ़ गए।

बस के निरीक्षण्‍ा के दौरान उनकी नजर बंद पड़ी इमरजेंसी खिड़की पर गयी तो वह उत्सुकतावश आपात कालीन खिड़की खोलने लगे। हालांकि खिड़की काफी दिनों से जाम होने के कारण नहीं खुल सकी। इस घटना से झेंप महसूस किए मंत्रीजी ने बस के परिचालक को बुलाकर खिड़की खोलने के लिए कहा।लेकिन बेचारा कंडक्टर भी काफी मेहनत के बाद सफल न हो सका।बसों का यह हाल देखकर मंत्री जी के तेवर गर्म हो गए।

उन्‍होंने तत्काल ही बस स्टेशन के सर्विस मैनेजर को बुलाया और फटकार लगाते हुए उससे पूछा कि शासनादेश तुम्‍हें नहीं मालूम हुआ है क्या!शासनादेश के मुताबिक जिस भी बस में मेंटेनेंस नहीं दिखेगा तो सर्विस मैनेजर को निलंबित कर दिया जाएगा। यह सुनकर सर्विस मैनेजर सकते में आ गया।हालांकि मंत्री स्‍वतंत्र देव सिंह ने उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया।

इस दौरान उन्‍होंने अन्य बसों और स्टेशन पर यात्रियों से उनकी सुविधा को लेकर सवाल जवाब भी किया। इसके बाद जब मंत्री जी रोडवेज वर्कशाप पहुंचे, तो वहां पर भी विभाग का हाल बयाँ करने के लिए जगह जगह पर बरसात का पानी जमा हुआ था।

हालांकि वह किनारे से निकलते हुए निरीक्ष्‍ाण कर वापस लौट गए। उन्‍होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आपातकालीन नहीं खुलने पर सर्विस मैनेजर को चेतावनी दी गई है। नेपाल से गोरखपुर होकर दिल्‍ली जाने वाली बसों के साथ अन्‍य बसों की सुरक्षा को लेकर किए गए सवाल पर उन्‍होंने कहा कि वह इस पर विचार करेंगे।