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चीनी छात्रों को अमेरिका में होती है सांस्कृतिक कठिनाई

Image-for-representation-5न्यूयार्क: वर्ष 2010 की गर्मियों की एक सुबह ठंडी हवा के झोकों के बीच अमेरिका के आयोवा राज्य की आयोवा स्टेट विश्वविद्यालय की तरफ 18 वर्षीय छात्रा जेन यू अपनी पीठ पर झोला टांगे जल्दी-जल्दी कदम बढ़ा रही थी। वह उस विश्वविद्यालय की नई छात्रा थी।
वह उन दिनों को याद कर बताती हैं, “हालांकि मैं किसी भी वातावरण में तेजी से ढल जाती हूं। लेकिन कभी-कभी किसी अमेरिकन चुटकुले पर मुझे छोड़कर जब पूरी क्लास ठहाके लगाती थी तो मैं थोड़ा असहज महसूस करती थी। हालांकि मैं बिना चुटकुला समझे उस पर हंसती थी। यह उस वक्त मेरे लिए थोड़ा निराशाजनक था क्योंकि मैं अपने आप को सांस्कृतिक रूप से बाहरी समझती थी। ऐसा खासतौर से उस वक्त ज्यादा महसूस होता था जब छात्र अध्यापकों के साथ संवाद करते थे।”
उसके बाद उन्होंने अमेरिकी पॉप संस्कृति को समझने के लिए टीवी पर अमेरिकी कार्यक्रम देखना शुरू किया। वे बताती हैं कि कॉमेडियन जोन स्टेवार्ट का व्यंग्य समाचार ‘द डेली शो’ उनका पसंदीदा कार्यक्रम था। वे कहती है कि यह एक ऐसा कार्यक्रम था जो हंसी-हंसी में काफी गंभीर बातें कह जाता था।
आज 2015 में जेन कोलंबिया विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई खत्म करके निकली हैं। अब वे कहती है, “हालांकि अगर आप अमेरिकी संस्कृति को समझने में लंबा वक्त लगाएंगे तो धीरे-धीरे आप उनके चुटकुलों को समझने लगेंगे, लेकिन अभी भी मैं कई बातों को नहीं समझ पाती हूं।”
अमेरिकी संस्कृति के बीच अपने आप को बाहरी समझने की यह भावना जेन जैसी ही कई अन्य चीनी छात्रों की है जो पिछले कुछ सालों से अमेरिकी स्कूलों में पढ़ाई करने आ रहे हैं। हाल के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है कि अमेरिका के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 2014-15 के अध्ययन सत्र में चीन के 3,04,000 से ज्यादा छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। यह आंकड़ा सभी अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का 31.2 फीसदी है।
अमेरिका में बड़ी तादात में दूसरे देशों के छात्र भी आते हैं जिनके कारण भी चीनी छात्र स्थानीय समुदाय से ज्यादा घुलमिल नहीं पाते। हाल में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक लगभग 40 फीसदी अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की करीबी दोस्ती किसी अमेरिकी छात्र से नहीं होती। चीन समेत पूर्वी एशिया के दूसरे देशों के छात्रों का कहना है कि वे अमेरिकी संस्कृति में फिट होने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन यह उनके लिए कठिन होता है।
अमेरिकी स्कूलों और कॉलेजों में हालांकि दुनिया भर के सभी संस्कृतियों के छात्र पहुंचते हैं, लेकिन वहां बड़ी आसानी से देखा जा सकता है कि सब अपनी-अपनी संस्कृति के छात्रों के साथ ही घुलते-मिलते हैं। इस बारे में अमेरिकी छात्रों का कहना है कि चीनी छात्रों का क्लासरूम में होना तो अच्छी बात है, लेकिन उनके साथ घुलना-मिलना एक अलग मामला है। हालांकि चीनी छात्र उनसे घुलने-मिलने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनके बीच एक अदृश्य रेखा को साफ महसूस किया जा सकता है।
न्यूयार्क के फोर्डम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र या लिन कहते हैं, “ज्यादातर चीनी छात्र सामाजिक गतिविधियों में खुलकर हिस्सा लेते हैं। लेकिन उसके बावजूद उनकी अमेरिकी छात्रों के साथ दोस्ती नहीं हो पाती।” उनकी बातों से सहमति जताते हुए फोर्डम की ही पूर्व छात्रा लिंडा कहती है कि स्थानीय अमेरिकी छात्रों से परिचय होना तो बहुत आसान है, लेकिन उनके साथ घनिष्ठ संबंध बनाना काफी मुश्किल है। इसका मुख्य कारण छात्रों में समान संस्कृति वाले के साथ घुलने-मिलने की प्रवृत्ति होना है।
इस बारे में हंटर कॉलेज के शहरी मामले और योजना विभाग के प्रोफेसर पीटर क्योंग का कहना है कि अमेरिकी विश्वविद्यालय को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे अंतर्राष्ट्रीय छात्र यहां सहज महसूस कर पाएं और स्थानीय संस्कृति से घुलमिल पाएं। वे कहते हैं कि यहां के शिक्षण संस्थानों के लिए प्रमुख मुद्दा नहीं है। वे आगे कहते हैं कि हालांकि कुछ विश्वविद्यालयों ने इसकी शुरुआत की है कि अंतर्राष्ट्रीय छात्र उनके यहां कठिनाई महसूस न करें। खासतौर से उनका भाषा ज्ञान सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि वे स्थानीय बोली को समझ सकें।

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