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तीसरी तिमाही की विकास दर 7.3 फीसदी

Image-for-representationनई दिल्ली: देश की आर्थिक विकास दर मौजूदा कारोबारी साल की तीसरी तिमाही में 7.3 फीसदी रही, जो दूसरी तिमाही में 7.7 फीसदी और एक साल पहले समान अवधि में 7.1 फीसदी थी।
यह जानकारी सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़े से मिली। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक, ‘कृषि, वानिकी और मत्स्य’, ‘बिजली, गैस, जलापूर्ति तथा अन्य उपभोक्ता सेवाओं’ तथा ‘वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं’ में उत्पादन कम रहने से विकास दर दूसरी तिमाही के मुकाबले कम दर्ज की गई।
मौजूदा कारोबारी वर्ष में औसत से कम बारिश के कारण कृषि तथा संबंधित क्षेत्रों की विकास दर नकारात्मक एक फीसदी रही, जो दूसरी तिमाही में दो फीसदी थी।
बिजली, गैस, जलापूर्ति तथा अन्य उपभोक्ता सेवाओं की विकास दर छह फीसदी रही, जो दूसरी तिमाही में 7.5 फीसदी थी।
आलोच्य अवधि में वित्तीय और पेशेवर सेवाओं की आय 9.9 फीसदी बढ़ी, जो दूसरी तिमाही में 11.6 फीसदी बढ़ी थी।
सरकार ने दिसंबर में जारी मध्यावधि समीक्षा में मौजूदा कारोबारी साल के लिए विकास दर के अनुमान को पूर्व घोषित 8.1-8.5 फीसदी से घटाकर 7-7.5 फीसदी के दायरे में कर दिया था, क्योंकि बारिश कम होने से कृषि विकास दर घटने की संभावना थी।
आंकड़े पर अपनी प्रतिक्रिया में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के महासचिव ए. दीदार सिंह ने यहां एक बयान में कहा, “कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों की विकास दर घटी है और हमें जल्द ही स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि आम बजट में अर्थव्यवस्था को सही दिशा दी जाएगी। इसमें प्रमुख ध्यान निवेश और मांग बढ़ाने वाले कदमों पर होना चाहिए।”
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के अध्यक्ष सुनील कनोरिया ने कहा, “आगामी बजट में सरकार को कृषि, अवसंरचना, इस्पात, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में सकारात्मक नीतिगत व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था को गति मिले।”

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