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नेशनल हेराल्ड मामला : सोनिया, राहुल सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे

Son-ia-and-Rahul-Gandhiनई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नेशनल हेराल्ड मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें भेजे गए समन और दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा इसे रद्द न करने के खिलाफ गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
निचली अदालत ने भारतीय जनता पार्टी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नेशनल हेराल्ड मामले में दायर शिकायत पर सुनवाई के बाद इन्हें अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया था।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपने खिलाफ जारी समन को रद्द करने की गुजारिश की थी। लेकिन, उच्च न्यायालय ने 7 दिसंबर 2015 को इन्हें राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि इन्हें अदालत में पेश होना होगा।
कांग्रेस नेताओं ने इसी के खिलाफ अब सर्वोच्च न्यायालय की शरण ली है।
उच्च न्यायालय ने कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोहरा, गांधी परिवार के मित्र सुमन दुबे और पार्टी नेता ऑस्कर फर्नाडीस की भी समन के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
सोनिया और राहुल के अलावा सैम पित्रोदा और सुमन दुबे ने भी दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।
कांग्रेस नेताओं ने शीर्ष अदालत में दायर याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा मामले में उनके खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को भी चुनौती दी है।
सुब्रमण्यम स्वामी ने निचली अदालत में दर्ज अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि यंग इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के अधिग्रहण में धोखाधड़ी हुई है।
स्वामी का दावा था कि वाईआईएल में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। इन दोनों को एजेएल के अधिग्रहण से लाभ हुआ है।
स्वामी ने आरोप लगाया कि एजेएल को कांग्रेस से 90.25 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण मिला था और कांग्रेस पार्टी ने मात्र 50 लाख रुपये में यह ऋण वाईआईएल को हस्तांतरित कर दिया था।
उस समय एजेएल को अध्यक्ष मोतीलाल वोरा थे। एजेएल ने दावा किया था कि वह ऋण का पुनर्भुगतान करने में असमर्थ है और इसके एवज में कंपनी और इसकी परिसंपत्तियों को वाईआईएल को सौंपने के लिए सहमत है।
कांग्रेस का कहना है कि किसी भी आरोप में सच्चाई नहीं है। स्वामी उसके राजनैतिक विरोधी हैं और उनके द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही का मकसद केवल राजनैतिक हित साधना है।

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