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पठानकोट हमला : एनआईए ने किया एसपी के 'अपहरण' का नाट्य रुपांतरण

Punjab-SP-Salwinder-Singhपठानकोट/गुरदासपुर/चंडीगढ़: पठानकोट के आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक (एसपी) सलविंदर सिंह से फिर पूछताछ की।
एनआईए उन्हें अपने साथ वहां ले गई जहां कहा जा रहा है कि पठानकोट में हमला करने से पहले संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकियों ने उनका अपहरण किया था।
एनआईए ने ‘अपहरण’ की कड़ियों को जोड़ते हुए इसका नाट्य रूपांतरण किया। एनआईए ने वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले की जांच के लिए कई टीमें बनाई हैं। एनआईए, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की खामियों के साथ पूरे आतंकवादी हमले की जांच कर रही है।
सेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल के.जे. सिंह ने बुधवार को कहा कि यह कहना सही नहीं है कि आपरेशन में सेना की भूमिका सीमित थी।
पठानकोट वायुसेना अड्डे पर खोज और तलाशी अभियान बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। वायुसेना ने कहा कि अड्डे के कोने-कोने की जांच की जा रही है।
सुरक्षाकर्मियों ने बुधवार को पठानकोट वायुसेना अड्डे के पास से एक संदिग्ध युवक को पकड़ा।
एनआईए पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हमला करने वाले आतंकवादियों द्वारा कथित रूप से अपहृत पंजाब पुलिस अधीक्षक सलविंदर सिंह को कोलिया गांव ले गई जहां कहा जा रहा है कि सिह का उनके दोस्त राजेश वर्मा और रसोइये मदन गोपाल के साथ अपहरण किया गया था। जांच एजेंसी उन्हें वहां भी ले गई जहां उन्हें आतंकियों द्वारा कथित रूप से फेंका गया था। एनआईए ने सिंह द्वारा दी गई अपहरण की जानकारी का नाट्य रूपांतरण किया।
एनआईए ने सिंह से बुधवार को भी पूछताछ की। उनसे मंगलवार शाम को भी पूछताछ की गई थी। एनआईए के अधिकारियों की एक टीम ने गुरुदासपुर में उनके आवास पर उनसे लंबी पूछताछ की थी।
एनआईए ने राजेश शर्मा और मदन गोपाल से भी पूछताछ की है।
सिंह का पिछले सप्ताह की पठानकोट तबादला हुआ था। उन्होंने दावा किया था कि हथियारों से लैस चार-पांच आतंकवादियों ने उनका, वर्मा और उनके बावर्ची मदन का 31 दिसम्बर को पठानकोट से 25 किलोमीटर दूर कोलिया गांव के पास अपहरण कर लिया था।
इस पूरी घटना से शक के घेरे में आए सिंह ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया, “मेरी जानकारी 100 प्रतिशत सही थी। इसमें कोई शक नहीं है। मैंने तुरंत बाद ही वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी थी। मुझे नहीं पता कि इतनी देरी क्यों हुई?”
जांच एजेंसियां को हालांकि सिंह के दावे पर संदेह है और इसकी वजह उनके साथ अगवा हुए दो अन्य के बयान में एकरूपता का नहीं होना है।
एनआईए यह पता लगा रही है कि सिह कठुआ से रात 9.30 बजे निकले और उनका अपहरण अगर रात 12.30 पह हुआ तो बीच के तीन घंटे वह कहां थे।
सुरक्षाकर्मियों ने बुधवार को पठानकोट वायुसेना अड्डे के पास से एक संदिग्ध युवक को पकड़ा। इस युवक के कंधे पर बैग था और वह अवरोधक को कूदकर लांघने की कोशिश कर रहा था।
सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों ने अपने हथियार युवक पर तान दिए और उससे जमीन पर लेटने को कहा। उसका बैग एक तरफ रख दिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और पंजाब पुलिस के कमांडो को तुरंत घटनास्थल पर बुलाया गया।
दाढ़ी वाले इस आदमी ने काली जैकेट पहन रखी थी। शुरू में उसने अवरोधक को पार नहीं करने के सुरक्षाकर्मियों के आदेश की अनदेखी की।
चंडीगढ़ से खबर है कि सेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल के.जे.सिंह ने चंडीमंदिर स्थित कमान मुख्यालय में बुधवार को कहा कि पठानकोट के वायुसेना अड्डे पर आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में सेना की भूमिका सीमित नहीं थी।
उन्होंने कहा, “यह सही नहीं है कि सेना की भूमिका सीमित थी। पहला मुकाबला डीएससी और गरुड़ का हुआ। डीएसी बहुत बहादुरी से लड़े। इनमें से एक ने एक आतंकवादी को मार गिराया। दूसरे आतंकवादी की गोली से वह मारा गया।”
उन्होंने कहा, “दूसरा मुकाबला सैन्य टुकड़ी से हुआ। इसके बाद एनएसजी ने इन पर काबू पाया। यह विशेष बलों, गरुड़ और एनएसजी का संयुक्त अभियान था।”
उन्होंने कहा कि सेना के बम निरोधक दस्ते ने अभियान में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।
पठानकोट आतंकी हमले से निपटने के मामले में केंद्र सरकार की रणनीति की आलोचना हो रही है। खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) को आतंकियों से मुकाबले के लिए तैनात किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि देश का सबसे बड़ा कैंटोनमेंट, मामून सैन्य कंटोनमेंट पठानकोट के पास में ही है। यहां 50 हजार प्रशिक्षित सैन्यकर्मी हैं। इनका इस्तेमाल आतंकियों के खिलाफ किया जाना चाहिए था। इन्हें आतंकियों से निपटने का अनुभव है, साथ ही ये इलाके के भूगोल से भी अच्छी तरह परिचित हैं।

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