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पेट्रोल, डीजल पर 50 फीसदी कर भी सरकार के लिए नाकाफी

Image-for-representation-4अरविंद पद्मनाभन
कच्चे तेल के वैश्विक मूल्य में भारी गिरावट के बाद भी देश में सरकार द्वारा लगाए जा रहे भारी-भरकम कर और तेल विपणन कंपनियों की मुनाफा खोरी की वजह से आम जनता के लिए इसकी कीमत में मामूली गिरावट ही आ पाई है।
मार्च 2012 में देश में आयातित कच्चे तेल की कीमत 123.61 डॉलर प्रति बैरल थी, जो करीब 76 फीसदी घटकर आज 29.24 डॉलर प्रति बैरल रह गई है।
इस दौरान आम आदमी के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल मूल्य सिर्फ 18.9 फीसदी घटा है, जबकि डीजल मूल्य 10.1 फीसदी बढ़ा है।
यह सही है कि मार्च 2012 में डीजल पर सब्सिडी दी जा रही थी, जो उस समय 13.10 रुपये प्रति लीटर थी। इस सब्सिडी को जोड़ दिया जाए, तो उस समय डीजल मूल्य करीब 54.01 रुपये प्रति लीटर माना जा सकता है। इस आधार पर अभी डीजल मूल्य सिर्फ 16.6 फीसदी घटा है।
सितंबर 2014 में डीजल मूल्य पर सब्सिडी समाप्त हो गई और 16 अक्टूबर को कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर 3.56 रुपये का लाभ हो रहा था।
कच्चे तेल की वैश्विक कीमत घटने से देश का तेल आयात खर्च भी काफी घटा है। यह खर्च मौजूदा कारोबारी वर्ष के प्रथम महीने में 61.41 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो गत वर्ष की समान अवधि के 106.59 अरब डॉलर के मुकाबले 42.39 फीसदी कम है। यानी प्रथम आठ महीनों में ही सरकार को इस मद पर 45 अरब डॉलर बच गए।
अब कर पर गौर करें। जनवरी में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क प्रति लीटर क्रमश: 37 पैसे और दो रुपये बढ़ा दिया गया। इससे पहले दिसंबर में भी इसमें क्रमश: 30 पैसे और 1.17 रुपये वृद्धि की गई थी।
ज्ञात हो कि पेट्रोल और डीजल पर एक निश्चित राशि कर के रूप में लगाई जाती है। यानी कच्चे तेल मूल्य में चाहे वृद्धि या गिरावट हो, सरकार की आमदनी जस की तस रहने वाली है।
भारत पेट्रोलियम के आंकड़े के मुताबिक, दो जनवरी को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय कर क्रमश: 19.73 फीसदी और 13.83 फीसदी था, जो खुद में ही काफी अधिक है।
राज्य सरकार भी हालांकि अलग से बिक्री कर लगाती है। दिल्ली में यह पेट्रोल और डीजल पर क्रमश: 25 फीसदी और 17.39 फीसदी है। वहीं आंध्र प्रदेश में यह क्रमश: 39.83 फीसदी और 33.09 फीसदी है।
यानी, दिल्ली में पेट्रोल की करीब 60 रुपये प्रति लीटर खुदरा कीमत पर 50 फीसदी से अधिक यानी, 31.65 रुपये प्रति लीटर कर लगता है। डीजल की खुदरा कीमत करीब 45 रुपये प्रति लीटर पर 20 रुपये या 45 फीसदी कर लगता है।
अब सबकी नजर शुक्रवार 15 जनवरी पर टिकी हुई हैं, जब तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल मूल्य की समीक्षा करेंगी। देखना है कि इस बार आम आदमी के नसीब में क्या आता है।

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