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भारत को कई विकास इंजनों की जरूरत : जेटली

FM-Arun-Jaitley-at-Davosदावोस: केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यहां गुरुवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विकास के कई इंजन चाहिए और इस वक्त सरकार का ध्यान निजी निवेश आकर्षित करने पर अधिक है।
यहां चल रही विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक के इतर, भारतीय उद्योग परिसंघ और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप द्वारा आयोजित एक सत्र में उन्होंने कहा, “देश में अलग-अलग तरह की राय है, लेकिन यह मैं देख रहा हूं कि अधिकांश लोग विकास का समर्थन करते हैं और कम ही लोग हैं, जो ऐसा नहीं चाहते हैं। किसी भी अर्थव्यवस्था को विकास के कई इंजन चाहिए।”
जेटली ने कहा, “पहले हमारे पास कम इंजन थे और हमें कुछ और इंजन चाहिए। इनमें से एक है सरकारी निवेश, जो हम कर रहे हैं। हम अवसंरचना पर ध्यान दे रहे हैं और इतिहास में पहली बार हम सब्सिडी को तर्कसंगत बना पाए हैं।”
उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि हम देश के लोगों की विविध राय के बीच सहमति बना पाएंगे। कुछ कदम उठाने में विलंब हो रहा है, लेकिन इनमें से एक भी ऐसा नहीं है, जिसकी कहानी खत्म हुई हो।”
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बारे में उन्होंने कहा कि विधेयक पारित हो जाएगा, क्योंकि आने वाले समय में राज्यसभा में संख्या हमारे लिए अनुकूल हो जाएगी।
उन्होंने स्रोताओं से कहा, “हम पूरी दुनिया के लोगों से भारत की अवसंरचना विकास यात्रा में साझेदार बनने का अनुरोध कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “हमने हमेशा कहा है कि 7-7.5 फीसदी की वर्तमान विकास दर हमारी वास्तविक क्षमता नहीं है। हमारे पास इसे और 1-1.5 प्रतिशतांक बढ़ाने की क्षमता है। हमें विश्वास है कि हम उसे पा लेंगे।”
इससे पहले, गुरुवार सुबह सिंगापुर में हुए एक सम्मेलन में भेजे गए एक वीडियो संदेश में जेटली ने कहा कि भारत स्थिरता बढ़ाने के लिए कर व्यवस्था में बदलाव कर रहा है और इसे सरल बना रहा है तथा पुराने विवादों को निपटाने की कोशिश कर रहा है।
जेटली ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘डूइंग बिजनेस एक्रॉस एशिया : लीगल कनवर्जेस इन एन एशियन कंट्री’ में भेजे गए वीडियो संदेश में कहा, “भारत में जहां तक कर कानूनों का सवाल है हमारी कोशिश कर कानूनों में धीरे-धीरे बदलाव लाने, विभिन्न विवादों और मुद्दों का समाधान करने, विवेक के आधार पर फैसले लेने की गुंजाइश खत्म करने और स्थिरता तथा सरलता बढ़ाने की है।”

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