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महिलाओं को मंदिर जाने से नहीं रोका जा सकता : न्यायालय

Image-for-representation-1नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि मंदिर के पास संवैधानिक अधिकार नहीं होने की स्थिति में किसी भी महिला श्रद्धालु को वहां पूजा-अर्चना करने से नहीं रोका जा सकता।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति एन.वी.रामना की पीठ ने यह बात इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।
एसोसिएशन ने सबरीमाला अयप्पन मंदिर की उस प्रथा को चुनौती दी है, जिसके तहत मंदिर में 10 से 50 साल तक की क्रमश: बच्चियों, महिलाओं का प्रवेश वर्जित है।
अदालत ने कहा कि वह इस आयु समूह की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं देने की इस प्रथा का परीक्षण करेगी। अदालत ने इसके साथ ही कहा कि “मंदिर सिवाय धार्मिक आधार के किसी अन्य आधार पर प्रवेश वर्जित नहीं कर सकता। जब तक उसके पास इसका संवैधानिक अधिकार नहीं है, तब तक वह ऐसी रोक नहीं लगा सकता।”
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ फरवरी की तारीख दी है।इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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