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'विज्ञान कांग्रेस में पौराणिक कथाओं पर नहीं होगी चर्चा'

103rd-Science-Congressमैसूर: पिछले साल विज्ञान कांग्रेस में भारतीय पौराणिक कथाओं पर की गई परिचर्चा की चौतरफा आलोचना होने के कारण इस बार वैज्ञानिक काफी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। इस बार इस तरह के किसी कार्यक्रम को शामिल नहीं करने का निर्णय लिया गया है।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस के महासचिव अरुण कुमार ने आईएएनएस को बताया, “इस बार हमारा फोकस मुख्य रूप से केवल विज्ञान पर होगा। पिछली बार पौराणिक कथाओं पर दिए गए व्याख्यान पर वैज्ञानिक हलकों में काफी विवाद देखने को मिला था। इसलिए इस बार हमारा ध्यान केवल विज्ञान की परिचर्चा पर है।”
103वें सालाना भारतीय विज्ञान कांग्रेस का आयोजन इस बार बेंगलुरू से 140 किलोमीटर दूर मैसूर में किया जा रहा है। पिछले साल 102वें विज्ञान कांग्रेस का आयोजन मुंबई में किया गया था जहां दो वैज्ञानिकों ने 4 जनवरी 2015 को एक व्याख्यान में दावा किया था कि हवाई जहाज का आविष्कार भारत में वैदिक युग में ईसापूर्व 500 से 1500 साल पहले हुआ। कुमार कहते हैं कि इस बार हम पूरी तरह से ऐसी चीजों से परहेज कर रहे हैं।
दो जाने माने वैज्ञानिकों केरल के आनंद बोडास और मुंबई के अमेय याधव ने ‘संस्कृत के माध्यम से प्राचीन विज्ञान’ के व्याख्यान में इस बात का प्रदर्शन किया था कि प्राचीन विमान आज के विमान से कहीं अधिक उन्नत थे।
उन्होंने अपने व्याख्यान में बिना किसी रिकार्ड या रेफरेंस के बताया कि प्राचीन हवाई जहाज काफी विशाल होते थे और एक ग्रह से दूसरे ग्रह तक की यात्रा में सक्षम थे। इसके बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई।
कुमार कहते हैं, “इस बार परिचर्चा के विषयों का चयन विज्ञान एवं तकनीक मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय समेत सभी हितधारकों की सलाह से काफी सावधानी से किया गया है। हम इस बार मुख्य रूप से मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम पर फोकस कर रहे हैं।”
वे आगे कहते हैं, “इस बार कुछ भी विवादास्पद या आपत्तिजनक सामने नहीं आएगा। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कार्यक्रम में समीचीन विषय उठाए जाएं और ऐसा समाधान सामने आएं जिससे सभी को लाभ हो।”

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