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सर्वोच्च न्यायालय ने अरुणाचल मामला संवैधानिक पीठ को सौंपा

Supreme-Courtनई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में नाबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी के बागी विधायकों की तरफ से पैदा स्थिति को संभालने में राज्यपाल जे पी राजखोवा की भूमिका के मामले को संवैधानिक पीठ को सौंप दिया। न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति सी नागप्पन ने मामले को संवैधानिक पीठ को सौंपा।
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अदालत से आग्रह किया था कि इस मामले में संवैधानिक कानून और राज्यपाल की शक्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, इसलिए इसे संवैधानिक पीठ को सौंप देना चाहिए।
उधर, भाजपा विधायकों के समर्थन से बागी कांग्रेस विधायकों द्वारा कथित रूप से हटाए गए अरुणाचल विधानसभा के अध्यक्ष नाबाम रेबिया के वकील फाली नरीमन ने प्रधान न्यायाधीश टी.एस.ठाकुर की अदालत में पेश होकर आग्रह किया कि संवैधानिक पीठ इस मामले को जल्द से जल्द सुने।
प्रधान न्यायाधीश से उनकी याचिका की जल्दी सुनवाई के लिए पीठ के गठन का आग्रह करते हुए नरीमन ने कहा कि इसकी सुनवाई 21 जनवरी से पहले की जाए, क्योंकि दो विधानसभा सत्रों के बीच में छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी प्रधान न्यायाधीश की अदालत में कहा कि अगर मामले की जल्द सुनवाई नहीं हुई तो विधानसभा बुला ली जाएगी और सरकार गिर जाएगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा उपाध्यक्ष तेनजिंग नोरबु अध्यक्ष रेबिया के खिलाफ हैं।
रेबिया ने कांग्रेस के 14 बागी विधायकों को सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। नोरबु ने उनके फैसले को उलट दिया था। इटानगर में एक सामुदायिक भवन में हुए ‘विधानसभा सत्र’ में बागी कांग्रेस विधायकों और भाजपा विधायकों ने रेबिया को पद से हटा दिया था।
नरीमन और सिब्बल की दलीलों पर प्रधान न्यायाधीश ठाकुर ने कहा कि न्यायमूर्ति खेहर और न्यायमूर्ति नागप्पन द्वारा पारित आदेश से संबंधित कागजात को देखने के बाद ही वह इस पर कोई फैसला देंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्यपाल से कहा था कि वह 18 जनवरी तक विधानसभा का कोई सत्र न बुलाएं।

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