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सिंहावलोकन-2015: रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पर रहा जोर

Make-in-India-in-Defence-seनई दिल्ली: देश में बीते एक साल में इस साल 200 से अधिक हल्के हेलीकॉप्टर बनाने के लिए रूस की रजामंदी से मेक इन इंडिया कार्यक्रम को जहां काफी बल मिला है, वहीं दो लाख करोड़ रुपये (30 अरब डॉलर) के रक्षा उपकरणों की खरीदारी के एक बड़े सौदे को मंजूरी दी गई।
गत एक साल में रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया गया। वायुसेना ने युद्धक विमानों के लिए महिला पायलट को मंजूरी दे दी और नौसेना ने महिलाओं के निगरानी पायलट बनने का रास्ता साफ करने के लिए एक प्रस्ताव रखा।
इस साल अपनी तरह की एक पहली कार्रवाई में देश की सेना ने म्यांमार में घुस कर आतंकी शिविरों पर हमला किया।
साल के शुरू में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबाम गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और उसके बाद अमेरिका के साथ जून में नया रक्षा प्रारूप समझौता पर हस्ताक्षर हुए।
रक्षा खरीदारी के मोर्चे पर पी75 परियोजना के तहत छह और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी) को मंजूरी दी गई। यह सौदा 80 हजार करोड़ रुपये का है। इसके अलावा छह पनडुब्बियों का निर्माण पहले से मुंबई की कंपनी मझगांव डॉक लिमिटेड कर रही है।
आर्मी के लिए 2,900 करोड़ रुपये में 145 बीएई प्रणाली एम777 हल्के होवित्जर टैंक की खरीदारी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
सरकार ने इस साल नई रक्षा खरीद प्रणाली जारी की, जिसमें स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी को तरजीह दी गई है।
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 2017 तक के लिए रक्षा खरीद में स्वदेशी उपकरणों का अनुपात बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लक्ष्य तय किया है, जिसे अगले पांच साल में और बढ़ाकर 60-70 फीसदी किया जाएगा।
स्वदेशीकरण के एक बड़े कदम के तौर पर रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी कर दी गई।
साल के आखिर में अमेरिकी कंपनी बोइंग और भारतीय कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने एक संयुक्त उपक्रम कंपनी स्थापित करने की घोषणा की, जो विमानों के लिए एरोस्ट्रक्च र का निर्माण करेगी और एकीकृत प्रणाली का विकास करेगी। अनिल अंबानी के रिलायंस समूह ने भी भारती सेना के लिए हवाई प्रतिरक्षा प्रक्षेपास्त्र और राडार प्रणाली पर काम करने के लिए रूस की कंपनी अल्माजेंटी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
रक्षा मंत्रालय ने लंबे समय से प्रतीक्षित वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना की घोषणा कर दी, जिसमें 2013 को आधार वर्ष माना गया है। इस योजना में एक रैंक के ऊपरी और निचले स्तर के पेंशन के औसत के आधार पर नया पेंशन तय किया गया है, लेकिन औसत से अधिक पेंशन को सुरक्षा दी गई है। योजना में हर पांच साल में संशोधन होगा। सेवा निवृत्त सैनिक हालांकि इससे संतुष्ट नहीं हुए।

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