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सैयद मोदी के परिजनों को आज भी है न्याय का इंतज़ार

Syed-Modiहरिकेश सिंह (वरिष्ठ संवाददाता)
गोरखपुर: सैयद मोदी से हर खासो आम वाकिफ है। गोरखपुर की धरती को सैयद मोदी ने गौरवान्वित किया था । आज अगर वह जिंदा होते तो इस धरती को और ऊंचाईयों पर ले जाते। उनके परिवारजनों के चेहरे पर सैयद मोदी के ना रहने का गम तो है ही साथ ही उन्हें मोदी हत्याकांड में उचित न्याय न मिल पाने का असंतोष भी है।
उनके बड़े भाई सैयद बाकर ने कहा कि कि हत्याकांड की फिर से जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अभी हाल में संजय सिंह के सुपुत्र ने भाजपा ज्वाइन की है। भाजपा में जाते ही उन्होंने मोदी हत्याकांड की फिर से जांच की बात कही। जिससे नयी हमारे अंदर नयी आशा जागृत हुई।
उन्होंने कहा कि अगर उनके पास कोई सबूत है तो सीबीआई को उपलब्ध कराये। हत्या में प्रयुक्त रिवाल्वर बरामद हुई थी गवाह ने पहचान भी की गयी थी। सवाल उठाया कि जिस अभियुक्त को उम्रकैद हुई थी उससे सीबीआई ने पूछताछ क्यों नहीं की। सीबीआई ने तो उससे यह भी पूछने की जेहमत गवारा नहीं की कि उन्होंने किसके इशारे पर काम किया। बहुत सारे सवालात है। जो अभी अधूरे है। उन्होंने सरकार से हत्याकांड की फिर से जांच की जायें। हत्याकांड में शामिल असल मुजरिमों को सलाखों के पीछे भेजने का काम करें।
उन्होंने बताया कि सैयद मोदी का खुदा ने बेशकीमती हुनर से नवाजा था। सन् 1981-80 तक राष्ट्रीय बैडमिन्टन चैम्पियन रहे। आस्टेªलियन इंटरनेशनल 1983,84 में स्वर्ण पदक जीता। वहीं 1982 काॅमनवेल्थ गेम्स पुरूष एकल वर्ग में जीत हासिल कर स्वर्ण जीता। इसी साल एशियन गेम्स में कांस्य पद हासिल किया। 1981 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया।
एक बार का वाकिया बताया कि 1971 में जूनियर लेबल चैम्पियशिप में इनका मुकाबला बड़े भाई आबिद से हुआ। कड़ा मुकाबला था। ऐसा लग रहा था कि बड़े भाई हार जायेंगे। उन्होंने सैयद मोदी से इशारा किया। तो सैयद मोदी वह मैच हार गये। लेकिन उन्होंने वहां सभी का दिल जीत लिया।
सैयद मोदी का जन्म 31 दिसम्बर 1962 को चैरीचैरा से लगभग 5 किमी दूर सरदार नगर में एक मुस्लिम परिवार में हुआ। उनके पिता सैयद मीर हसन जैदी सरदार नगर की चीनी मिल में काम करते थे। अपने आठ भाई बहनों में सबसे छोटे थे। मोदी के बड़े भाई ने मोदी के बैडमिंटन खेलने के शौक का देखा तो सपोर्ट किया। बैडमिंटन कोचिंग करवायी।
स्कूल में गलती से उनका नाम मेहंदी की जगह मेादी लिख दिया जिसे बाद में भी दुरूसत नहीं किया। स्कूल में मोदी केवल एक एवरेज छात्र रहे। अपने आकर्षक व्यक्तित्व, खुशमिजाजी एवं खुले स्वभाव के कारण वह अपने स्कूल और कालेज जीवन में सभी के चहेते रहे। उनके बड़े भाईयों बैडमिंटन ट्रेनिंग में उन्हें आर्थिक रूप से स्पोर्ट किया।
मोदी ने 1976 में 14 साल की उम्र में जूनियर राष्ट्रीय बैडमिन्टन चैम्पियन बने। उसी साल पीके भन्डारिम से ट्रेनिंग लेना शुरू किया। 1980 में जैसे ही वह 18 वर्ष के हुए उन्होंने बैडमिन्टन की राष्ट्रीय चैम्पियनशिप जीत ली। इससे प्रभावित होकर खेल मंत्रालय ने उन्हें भारतीय रेल में वेलफेयर आफिसर पद पर तैनाती दे दी। उनकी तैनाती गोरखपुर में हुई। कुछ दिन बाद उनके कोच के निर्देश पर लखनऊ में उनका तबादला हो गया। उन्होंने लगातार आठ सालों तक बैडमिंटन पर अपनी बादशाहत कायम रखी।
1981 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। परिणय सबंधों में तनाव की स्थिति से गुजरने के कारण वह जीवन में प्रथम बार 1988 में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप हार गए। उनकी पत्नी अनीता सिंह का अफेयर होने के कारण वह तनाव की स्थिति में थे। इसके कुछ महीने बाद उनकी लखनऊ में गोली मार कर हत्या कर दी गयी।
पूरा विश्व मोदी की हत्या और उसके रच गए षडयंत्र पर हतप्रभ रहा। सीबीआई ने अमिता सिंह और अमेठी के राजा संजय सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज किया। सीबीआई को संदेह था कि संजय सिंह और अमिता के अफेयर के चलते मोदी की हत्या की है। बाद में संजय सिंह और अमिता सहित अन्य दो के खिलाफ मामला वापस ले लिया गया। बाद में संजय और अमिता ने विवाह कर लिया।
आरोपी अखिलेश सिंह और जितेन्द्र सिंह को भी बरी कर दिया गया। जबकी अमर बहादुर सिंह बलई सिंह ट्रायल के दौरान मर गये। भगत सिंह को अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा दी। लेकिन असली मुजरिम आज भी पकड़ में नही आये। सैयद मोदी के नाम पर रेलवे स्टेडियम का नाम सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम रखा गया।

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