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स्मार्ट सिटी चयन में क्षेत्रीय संतुलन की उपेक्षा : नीतीश

Bihar-CM-Nitish-Kumarपटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के किसी भी शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की सूची में शामिल नहीं किए जाने को लेकर शनिवार को कहा कि यह फैसला केन्द्र सरकार का है। उन्होंने कहा कि केन्द्र की कथनी और करनी में अंतर है।
पटना में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए शहरों को चुनने का काम केंद्र सरकार का है। किस शहर को चुनना है, क्या मापदंड तय करना है यह तय करना केन्द्र सरकार का काम है। उन्होंने कहा कि बिहार के किसी शहर को नहीं चुने जाने में क्षेत्रीय संतुलन पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, “सूची को देखने से पता चलता है कि शहरों के विकास को लेकर केन्द्र सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन की उपेक्षा की है।”
नीतीश ने कहा, “केन्द्र सरकार ने बिहार के शहरों में से कुछ शहरों को स्मार्ट सिटी के लिए चयन किया था। चयन करने के लिए उन्होंने जो शर्ते रखी और जिस प्रकार प्रस्ताव दिया था, सब कुछ भेजा गया। विधानसभा चुनाव के पूर्व ही केन्द्र सरकार द्वारा निर्णय लिया जा चुका था। अपने तैयार कराए गए प्रस्ताव पर भी वे अब अमल नहीं कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के कारण बिहार के शहरों को चयनित नहीं करने के आरोप को नकारते हुए कहा कि इसके लिए राज्य सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया था परंतु उनके पलट जाने का फैसला उनका है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की कोताही के कारण बिहार प्रथम चरण में स्मार्ट सिटी परियोजना से वंचित हो गया।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रस्ताव भेजने में देरी की। राज्य सरकार अगर स्मार्ट सिटी के लिए गंभीर होती तो तय मानदंडों के अनुसार प्रस्ताव भेजती।
गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने पहले चरण में देश के 20 शहरों का चयन स्मार्ट सिटी के रूप में किया है, जिसमें बिहार के एक भी शहर का नाम शामिल नहीं है।

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