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शिक्षा प्रेरकों को पिछले एक वर्ष से नहीं मिला मानदेय, भीख मांग जताया विरोध  

Contractual-teachers-stage-गोरखपुर: प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की कमी को पूरा करने के लिए 5 वर्ष पूर्व जिलास्तर पर डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर  शिक्षा प्रेरको की नियुक्ति तो कर ली गयी किन्तु अब पिछले एक वर्ष से उन्हें मानदेय देने के लिए सरकार के पास धन नही है।
नतीजा एक वर्ष के बकाये वेतन को वापस पाने के लिए इन्ही शिक्षा प्रेरको ने आज महानगर के प्रमुख चौराहों पर खड़े होकर भिक्षाटन किया। जिससे मिले पैसों को वो डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भेजकर लज्जित करने की बात की जा रही है।
पूरे उत्‍तर प्रदेश में साल 2011 में साक्षर भारत मिशन के तहत प्राथमिक स्‍कूलों में प्रेरक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन कम मानदेय में इनसे ज्‍यादा काम लेने के कारण इनका आक्रोश बढता जा रहा था। लेकिन पिछले एक साल से मानदेय नही मिलने और प्रदेश सरकार द्वारा इनके लिये कोई प्रयास नही होने के कारण आज इनका आक्रोश सडकों पर फूट पडा।
Staging-protestगोरखपुर में सैकडो की तादात में प्रेरकों ने हाथों में कटोरा लेकर सडकों पर भीख मांगा और भीख के रूपयों को मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को देने की बात कही।
साल 2011 में साक्षर भारत अभियान के तहत यूपी में शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए केन्‍द्र सरकार द्वारा संविदा पर प्रेरक शिक्षकों की न्युक्ति की गयी ।
इन प्रेरकों को 2000 हजार रूपये मानदेय देने की बात कही गई और इनका काम 15 साल से उपर के निरक्षर लोगों को स्‍कूल पर या गांव में जाकर पढाना है और उन्हे पढ़ने के लिए स्कूल तक लाने का प्रयास करना है। लेकिन इनसे वह सभी काम लिये जाने लगे जो एक प्राथमिक स्‍कूल के शिक्षक द्वारा किये जाते हैं।
इनसे बीएलओ का काम, जनगणना का काम, पेंशन सर्वे, बालगणना और प्रदेश सरकार की सभी योजनाओं को गांव गांव पहुंचाने में लगा दिया गया । इनसे 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम लिया जाता रहा लेकिन यह काम करते रहे पर आज उन्ही प्रेरकों की हालत खराब है।
Staging-protest-1पिछले बारह महीने से इन प्रेरकों को मानदेय नहीं मिला है, जिसकी वजह से ये लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं ।इनका कहना है कि मात्र दो हजार रूपयों में इनसे एक सरकारी अध्‍यापक जैसा काम लिया जा रहा है और यह रूपये भी इनको एक साल से नही मिले हैं। रूपये मांगने पर अधिकारी फंड की कमी का रोना रो रहे हैं और लखनऊ निदेशालय से जाकर पता करने को कहते हैं।
इनको यूं तो केन्‍द्र सरकार के द्वारा रखा गया है लेकिन इनको सेलरी देने सहित इनसे सभी काम करवाने का काम प्रदेश का बेसिक शिक्षा विभाग करवाता है । इन सबने अपने हक की मांग के लिये जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर मुख्‍यमंत्री तक को कई बार पत्र लिखा पर हर जगह से मायूस होने के बाद अब हाथों में कटोरा लेकर भीख मांगने निकल पडे हैं ।
इन रूपयों को यह मुख्‍यमंत्री केा सौंपेगे जिससे उनको अपना बर्थडे मनाने और सैफई महोत्‍सव मनाने में आसानी हो। मुख्‍यमंत्री इन भीख के रूपयों से शर्मिन्‍दा होकर इनके एक साल की तनख्‍वाह को अगर दे दें तो इनके परिवार में भी रौनक आ जायेगी।

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