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कोयला, विद्युत क्षेत्र में 10 खरब डॉलर निवेश होगा : पीयूष

Union-Minister-Piyush-Goyalमुंबई: केंद्रीय विद्युत, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2030 तक अकेले कोयला, विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र 10 खरब डॉलर के निवेश अवसर प्रदान करने में सक्षम होंगे।
गोयल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि निर्धनतम लोगों को ही सबसे पहले ऊर्जा और बेहतर जिंदगी सुलभ हो।
यहां चल रहे ‘मेक इन इंडिया’ सप्ताह के दौरान ‘विद्युत एवं कोयला’ पर आयोजित एक संगोष्ठी में गोयल ने कहा, “सरकार के अथक प्रयासों से विद्युत क्षेत्र विकास के नए मुकाम पर पहुंच गया है, जिसकी बदौलत इस क्षेत्र में वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2020 तक के पांच वर्षों की अवधि में तकरीबन 250 अरब डॉलर के निवेश अवसर नजर आ रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने वर्ष 2035 तक 20.3 खरब डॉलर के निवेश अवसर का आकलन किया है।
गोयल ने कहा, “जब मैं वर्ष 2030 तक 10 खरब डॉलर के निवेश के बारे में चर्चा करता हूं, तो यह एक सुपरिभाषित क्षेत्रवार योजना के रूप में सामने आता है। पारेषण क्षेत्र में क्या जाएगा, नई खदानों के खुलने को लेकर क्या होगा, हम कोयला क्षेत्र में प्रौद्योगिकी कैसे लाएंगे, ऊर्जा में दक्षता की तरफ हमारे कदम क्या होंगे, हम किस तरह से ऐसे नए कोयला उत्पादन संयंत्र लाने जा रहे हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर संयंत्र साबित होंगे।”
उन्होंने कहा, “हम अपने गैस आधारित संयंत्रों के लिए क्या करने जा रहे हैं, हम यह किस तरह से सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि राज्यों की वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए वितरण क्षेत्र एक जीवंत एवं लाभप्रद व्यवसाय साबित हो। इन सभी के लिए विस्तृत विवरण तैयार किए गए हैं। यह भारतीय एवं विदेशी दोनों ही निवेशकों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराता है।”
देश में विद्युत एवं कोयले की पर्याप्त उपलब्धता का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा, “हमें भविष्य पर नजर रखने की जरूरत है और हम विद्युत क्षेत्र की समस्त वैल्यू चेन में व्यापक तौर पर शुभारंभ करने में जुटे हुए हैं, चाहे यह ईंधन की उपलब्धता हो, विद्युत उत्पादन क्षमता का विस्तारीकरण हो अथवा पारेषण क्षेत्र में व्यापक निवेश।”
उन्होंने कहा, “वितरण क्षेत्र की मजबूती के लिए पर्याप्त सहायता मिल सके और यह सही अर्थो में जीवंत साबित हो सके, वितरण स्तर पर होने वाला नुकसान कम हो सके और इन कार्यक्रमों का व्यापक स्तर पर शुभारंभ कर शुल्क दरों को प्रतिस्पर्धी, किफायती एवं निम्नस्तर पर रखने में मदद मिल सके।”

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