उत्तर प्रदेश

उप्र उपचुनाव से तय होगी अगले चुनाव की दिशा

By-election-in-Uttar-Pradesलखनऊ: उत्तर प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों पर 13 फरवरी को होने वाले उपचुनाव को समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस सेमीफाइनल मान रही हैं। इनका मानना है कि इसमें मिले वोट अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की दशा और दिशा तय करेंगे।
मालूम हो कि जिन सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है वे तीनों सीटें सपा के पास थीं जो जीते प्रत्याशी के निधन के कारण रिक्त हुई हैं। मुजफ्फरनगर से चितरंजन स्वरूप, देवबंद से राजेन्द्र सिंह राणा और फैजाबाद की बीकापुर सीट से मित्रसेन यादव चुनाव जीते थे।
विधानसभा के 2012 में हुए चुनाव में इन तीन सीटों में दो सीटों मुजफ्फरनगर और देवबंद में भाजपा दूसरे स्थान पर रही थी। इसमें देवबंद सीट काफी कम अंतर से उसके हाथ आते आते फिसल गई थी। तीनों सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है तो दलित वोट भी हार जीत में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं।
सपा के लिए तीनों सीटें प्रतिष्ठा का सवाल
सपा के लिए तीनों सीटों के उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल हैं। दलित वोट कभी भी पार्टी के पास नहीं रहे थे। सपा इस बार भी इस वोट बैंक पर भरोसा नहीं कर रही है। यदि एक सीट भी पार्टी के हाथ से निकली तो पंचायत चुनाव में मिली भारी भरकम जीत का जश्न मातम में बदल सकता है। हालांकि राज्य के लोग अच्छी तरह जान रहे हैं कि पंचायत चुनाव में जीत कैसे हासिल की गई है। सपा इन सीटों पर सहानुभूति वोट के सहारे हैं। यही कारण है कि पार्टी ने तीनों सीटों पर जीते प्रत्याशियों के बेटों को मैदान में उतारा है। 13 फरवरी को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार गुरुवार शाम को थम जाएगा जबकि मतगणना 16 फरवरी को होगी।
भाजपा की दलित वोटों नजर
भाजपा पश्चिम उ.प्र. की दो सीटों देवबंद और मुजफ्फरनगर पर एक बार फिर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की फिराक में है। इसके अलावा दलित वोटों पर भी उसकी नजर है। भाजपा नेता संगीत सोम और संजीव बालियान की हुई चुनावी सभाएं इसी ओर इशारा कर रही हैं। भाजपा की सभाओं में बताया जा रहा है कि कैसे बाकी राजनीतिक दलों ने दलितों को ठगा है।
कांग्रेस भी लगा रही दम
कांग्रेस को यूपी में राजनीतिक तौर पर भले ही गंभीरता से नहीं लिया जाता हो लेकिन पार्टी इस बार उपचुनाव गंभीरता से लड़ रही है। प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री समेत अन्य नेता उपचुनाव वाले इलाके में सभा कर चुके हैं। बीकापुर क्षेत्र में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री की सभा होनी है। कांग्रेस अपने परम्परागत दलित वोट को वापस पाने के लिए पूरा प्रयास कर रही है।
ओवैसी भी दलित-मुस्लिम गठजोड़ में जुटे
इन तीन दलों के कोण में चैथा कोण असउद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन बना रही है। बीकापुर सीट के लिए उनकी हुई सभाओं में जुटी भीड़ को यदि किनारे कर दिया जाए तो वह मुस्लिम दलित गठजोड़ बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। सभाओं में उनके हमले पर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ही रहे हैं। वह मतदाताओं को यह बताने का पूरा प्रयास कर रहे हैं कि कैसे सपा ने मुसलमानों और दलितों को ठगा है।
बसपा इस बार भी उपचुनाव के मैदान से बाहर
उपचुनाव नहीं लड़ने की अपनी नीति के तहत बसपा इस बार भी उपचुनाव से बाहर है। मायावती के शासनकाल में भी हुए उपचुनाव में बसपा ने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे। सपा, कांग्रेस और भाजपा उपचुनाव को इस लिहाज से सेमीफाइनल मान रही है कि इसमें मिले वोट अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की दशा और दिशा तय करेंगे।

fb
AD4-728X90.jpg-LAST

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *