उत्तर प्रदेश

उप्र के विकास के बगैर देश का विकास संभव नहीं : अखिलेश

UP-CM-Akhilesh-Yadavलखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से उत्तर प्रदेश के तेजी से विकास के लिए बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेस-वे निर्माण, औद्योगिक विकास, कृषि, सिंचाई, प्राकृतिक आपदा, मेट्रो रेल वगैरह के लिए अधिकतम सहयोग का अनुरोध किया है।
नई दिल्ली में शनिवार को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा आयोजित बजट पूर्व बैठक में उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने के मद्देनजर प्रदेश सरकार पर आने वाले व्यय भार के 50 प्रतिशत अंश तक सहायता प्रदान करने का भी अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास के बगैर देश का विकास संभव नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश के पिछड़ेपन तथा भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अधिक से अधिक केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र बाजपेयी ने उनका बयान पेश किया।
अपने वक्तव्य में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनसंख्या एवं भौगोलिक ²ष्टि से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है। उत्तर प्रदेश को विकास के पथ पर तेजी से ले जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा अपने सीमित संसाधनों से गंभीर प्रयास किए गए हैं। इसके साथ ही, राज्य के विकास के लिए तमाम नीति विषयक निर्णय लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि विकास, खाद्य प्रसंस्करण, चीनी उद्योग विकास, अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश, सूचना प्रौद्योगिकी, सौर ऊर्जा आदि के लिए नई नीतियां बनाई गई हैं। सरकार द्वारा उठाए कदमों के परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास से ही देश सुनहरे भविष्य की ओर अग्रसर होगा।
यादव ने 14वें वित्त आयोग की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि विभाज्य पूल को 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने की संस्तुति को केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन साथ ही केंद्र पुरोनिधानित योजनाओं के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों के अंश में उत्तर प्रदेश राज्य का अंश 19.677 प्रतिशत से घटकर 17.959 प्रतिशत के स्तर पर आ गया, जिससे विभाज्य पूल में हुई वृद्धि का राज्य को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ केंद्र की कई योजनाओं को डि-लिंक या केंद्रांश में कमी कर दी गई है। राज्यों से अपेक्षा की गई है कि विभाज्य पूल में की गई वृद्धि से इन योजनाओं का वित्त पोषण किया जाए।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित अधिकांश योजनाएं जनसामान्य से जुड़ी हुई हैं। केंद्र सरकार की तुलना में राज्य सरकार आम जनता के अधिक निकट है, जिस कारण इन योजनाओं को समाप्त किया जाना संभव नहीं है। राज्य को अपने सीमित वित्तीय संसाधनों से इन योजनाओं को चलाना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में सूखे एवं ओलावृष्टि तथा असमय वर्षा तथा फरवरी, मार्च, 2015 में चक्रवाती तूफान के कारण हुई क्षति की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि इन विपदाओं से लगभग 7,500 करोड़ रुपये की हानि हुई है, जिसके सापेक्ष केंद्र सरकार ने मात्र 2,801 करोड़ रुपये राज्य सरकार को उपलब्ध कराए हैं। फिर भी राज्य सरकार ने किसानों की हानि की अधिक से अधिक भरपाई की है।
उन्होंने अनुरोध किया कि केंद्र सरकार द्वारा वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू किए जाने के प्राथमिक वर्षो में प्रदेश सरकार पर आने वाले व्यय भार के 50 प्रतिशत अंश तक की सहायता प्रदान की जाए।

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