उत्तर प्रदेश

मुलायम देश के सबसे बड़े पूंजी परस्त : सपा नेता लौटनराम

Mulayam-Singh-Yadav-(file-pलखनऊ: अभी तक विपक्षियों पार्टियों के निशाने पर रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया मुलायम सिंह यादव अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। सपा के ही एक नेता ने मुलायम को देश का सबसे बड़ा पूंजीपरस्त और तुच्छ जातिवादी नेता करार दिया है।
राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव व सपा नेता चौ लौटनराम निषाद ने पार्टी में फैले जातिवाद, भाई भतीजावाद, परिवारवाद, पूंजीवादी सोच व माफिया परस्ती पर उंगली उठाई है।
उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख मुलायम जातिवाद व पूंजीवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। मुलायम के लिए तुच्छ जातिवाद, परिवारवाद ही समाजवाद की परिभाषा बन गया है।
निषाद ने कहा कि विधान परिषद सदस्यों की घोषित सूची में 31 में से 16 यादव जाति के लोगों को टिकट दिया जाना सपा मुखिया मुलायम सिंह के तुच्छ जातिवाद का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि एक भी दलित व अतिपिछड़े को उम्मीदवार न बनाकर सपा ने 38 प्रतिशत अतिपिछड़ों व 21 प्रतिशत दलितों को सिरे से खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि शायद सपा मुखिया 38 प्रतिशत अतिपिछड़ों को अपना वोट बैंक ही मानते हैं, जो न्याय संगत नहीं है।
निषाद ने कहा कि एमएलसी चुनाव की ही तरह जिला पंचायत अध्यक्ष के 74 में 39 व ब्लाक प्रमुख के लिए सामान्य व पिछड़े वर्ग की 60-70 प्रतिशत सीटों पर यादवों को ही उम्मीदवार बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि यूपी के जातिगत समीकरण में निषाद, लोधी, केवट, मल्लाह, कश्यप, रायकवार, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, धीवर, राजभर, चैहान, तेली, किसान, प्रजापति, नाई, विश्वकर्मा, पाल आदि 38 प्रतिशत अतिपिछड़ी जातियां मुलायम के लिए महज वोट बैंक हैं। उन्होंने कहा कि अतिपिछड़ों के लिए मुलायम की मंशा न्याय संगत नहीं है।
उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरण में यादव-10.48, निषादवंशी-10.25, लोधी-3.60, जाटव-11.56, गैर जाटव दलित-9.11, मुसलमान-16.46, गैर यादव मध्यवर्ती जातियां-6.62, अन्य एमबीसी व ईबीसी-22.09 प्रतिशत हैं। लेकिन मुलायम के लिए यादवों के आगे अतिपिछड़े व दलित समाज को कोई स्थान नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि मुलायम का वह कथन कि 2017 में नहीं तो सपा की कभी सरकार नहीं बनेगी, सत्य साबित होगा। सपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में 60 सीट भी नहीं जीत पाएगी।

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