उत्तर प्रदेश

सीबीआई ने करोड़ों के घोटाले के आरोपी यादव सिंह को किया गिरफ्तार

CBI-arrests-Yadav-Singhलखनऊ: केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने करोड़ों के घोटाले के आरोपी नोएडा के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने पहले यादव सिंह से पूछताछ की। उसके जवाबों से संतुष्ट न होने पर जांच एजेंसी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस-वे अथारिटी के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह को सीबीआई पिछले कई दिनों से पूछताछ के लिए दफ्तर बुला रही थी मगर कोई न कोई बहाना बना कर यादव सिंह सीबीआई दफ्तर नहीं जा रहा था।
अंतत: सीबीआई के अधिकारियों ने बुधवार शाम को यादव सिंह के घर दबिश देकर उसे पकड़ लिया और कार्यालय लाकर पूछताछ शुरू किया। पूछताछ के दौरान जब सीबीआई के अधिकारी यादव सिंह के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुए तो उसे गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को उसे गाजियाबाद की सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि नोएडा में विकास कार्यो में हुए घोटालों की जांच वर्ष 2014 के नवंबर में सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने इसके बाद छापेमारी कर यादव सिंह के यहां से 10 करोड़ रुपये नगदी, आभूषण और ढेर सारी अचल संपत्तियों के कागजात जब्त किए थे। सीबीआई ने बैंकों में लॉकर खुलवाकर वहां से भी कीमती जेवर बरामद किए थे।
समाजसेवी नूतन ठाकुर इस मामले में कथित तौर पर यादव सिंह को सीबीसीआईडी द्वारा मिली क्लीन चिट को लेकर हाईकोर्ट चली गई। 16 जुलाई 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यादव सिंह और उसके करीबियों के खिलाफ सीबीआई जांच करने के आदेश दिए। इसके साथ ही प्राधिकरण द्वारा 2002 से 2014 तक जारी किए सभी ठेकों की भी जांच के आदेश दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 4 अगस्त 2015 को सीबीआई ने इस मामले में दो एफआईआर दर्ज की। एक एफआईआर में सिर्फ यादव सिंह को नामजद किया गया है।
मायावती सरकार की आंख का तारा रहे यादव सिंह सपा सरकार बनते ही पहले सस्पेंड किए गए। फिर उनका नोएडा से काम छीन लिया गया। इसके बाद सिंह बहाल भी हो गए और उन्हेंं नोएडा का ही नहीं यमुना एक्सप्रेस वे का काम भी मिल गया।
यादव सिंह भले ही नोएडा डेवलपमेंट अथॉरिटी चीफ इंजीनियर हो लेकिन अपने राजनीतिक कनेक्शनों को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहे। मायावती सरकार के दौरान भी यादव पर नोएडा में कई परियोजनाओं में धांधली के आरोप लगे थे।
यादव की हैसियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर 954 करोड़ रुपये के ठेके अपने करीबियों को बांट दिए थे। इसके बाद अखिलेश सरकार ने यादव सिंह के खिलाफ विभागीय जांच बिठाकर उन्हें निलंबित कर दिया था। लेकिन बाद में उनका निलंबन वापस ले लिया गया।
सत्ता को उंगलियों पर नचाने का गुमान रखने वाला यादव सिंह आगरा के गरीब दलित परिवार में जन्मा था। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमाधारी यादव सिंह ने 1980 में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नोएडा अथॉरिटी में काम शुरू किया।
 

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