उत्तर प्रदेश

प्रदेश के कर्मचारियों का HRA 20 फीसदी बढ़ा, 7वें वेतन आयोग के लिए बनी कमेटी

UP-CM-Akhilesh-Yadavलखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। अखिलेश यादव कैबिनेट ने हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA 20 फीसद बढ़ा दिय़ा है। केंद्र के 7वें वेतन आयोग की तर्ज पर वेतन बढ़ाने के लिए एक कमेटी भी बना दी है। इस फैसले से प्रदेश के करीब 16 लाख कर्मचारियों को सीधा लाभ पहुंचेगा। राज्य के कर्मचारियों का एचआरए 200 से 2000 रुपए तक बढ़ जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिया था कि केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 7वें वेतन आयोग की अनुशंसाओं को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य सरकार भी इसे अपने कर्मचारियों पर लागू करने के लिए तैयारी कर चुकी है. 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से प्रदेश के करीब 22 लाख कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनरों को लाभ मिलेगा.
राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2016-17 के वार्षिक बजट में करीब 23 हजार करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान 7वें वेतन आयोग की अनुशंसाओं को लागू करने के लिए किया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया था कि सरकार को सूबे के अधिकारियों और कर्मचारियों को 7वां वेतन देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.
समिति के लिए अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी जी. पटनायक व आरएम श्रीवास्तव के प्रत्यावेदन पहले से ही विचाराधीन हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव वेतन समिति कर्मचारियों के मौजूदा आवास किराया भत्ते में 20 फीसदी वृद्धि पर पहले ही सहमति जता चुकी है।
माना जा रहा है कि कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर भी मुहर लगी इसके साथ ही कर्मचारियों की यह बड़ी मांग पूरी हो जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के प्रस्ताव पर बैठक में मुहर लगेगी या नहीं।
वजह, मुख्य सचिव ने एक दिन पहले ही राज्य कर्मचारियों को इस संबंध में आश्वासन दिया है लेकिन कैबिनेट के प्रस्तावित एजेंडे में यह प्रस्ताव शामिल नहीं है। हालांकि बैठक से पहले तक प्रस्ताव शामिल किए जाते रहे हैं।
इसके अलावा बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों से सेवानिवृत्त शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को न्यूनतम 3500 रुपये पेंशन व पारिवारिक पेंशन दिए जाने संबंधी प्रस्ताव पर भी मुहर लगी।
इसी तरह जनेश्वर मिश्र राज्य हथकरघा पुरस्कारों की राशि बढ़ाने, अधीनस्थ लेखा संवर्ग अराजपत्रित की सेवा नियमावली में संशोधन व पीएमएस संवर्ग की वेतन विसंगतियों पर भी फैसला ।।
सूबे में जल्द ही अस्पताल खुद मरीजों के पास पहुंचेंगे। इसके लिए सरकार नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू करने होने जा रही है। यह मोबाइल डिस्पेंसरी मरीजों का मुफ्त इलाज करेगी। सरकार इनके चलाने का खर्च खुद उठाएगी।
मोबाइल यूनिटें उन दूरस्थ इलाकों में जाकर इलाज करेंगी जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं हैं। 18 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश सरकार ने सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 170 मोबाइल यूनिटें चलाने का निर्णय किया है। दो-दो वाहनों की एक मोबाइल मेडिकल यूनिट बनाई जाएगी। इनमें डॉक्टर, नर्स के साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद रहेगा।
सभी जरूरी जांचें भी मौके पर हो सकेंगी। ये मेडिकल यूनिटें पीपीपी मोड पर संचालित की जाएंगी। इसके टेंडर प्रपत्र को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही टेंडर आमंत्रित कर दिया
राजधानी के चक गंजरिया में पीपीपी मोड पर बनने वाले सुपर स्पेशियलिटी कार्डियक अस्पताल के लिए टेंडर की बदली शर्तों को कैबिनेट के समक्ष रखा गया
नई शर्तों के तहत अब सरकार 10 एकड़ जमीन 50 साल के लिए लीज पर देगी। इसके साथ ही जो सबसे अधिक बेड सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम रेट पर देगा, उसे ही टेंडर दिया जाएगा।
टेंडर की शर्तों में इसलिए बदलाव किया गया ताकि पीपीपी मोड पर बनने वाले अस्पताल को पार्टनर मिल सकें। अब तक नौ बार सरकार टेंडर आमंत्रित कर चुकी है लेकिन किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।

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