उत्तर प्रदेश

कौमी एकता दल-सपा विलय पर संग्राम, शिवपाल ने दी सफाई

Akhilesh-Yadav-and-Shivpal-लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर संग्राम छिड़ गया है। कौमी एकता दल (कौएद) के सपा में विलय का मामला अब सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के दरबार में पहुंच गया है।
सपा सूत्रों के मुताबिक, विलय पर अंतिम फैसला 25 जून को होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि अखिलेश यादव कौएद के सपा में विलय से इतने नाखुश थे कि पार्टी प्रमुख से पूछे बिना ही विलय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मंत्री बलराम यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया।
पार्टी के छोटे-छोटे फैसलों पर पिता की राय लेने वाले अखिलेश यादव ने इस मसले पर उनसे पूछने की जरूरत नहीं समझी। उनका यह फैसला यह बताने के लिए काफी था कि वह सरकार के अंदर के सारे फैसले अकेले ले सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, मुलायम सिंह यादव ने भी कौएद के विलय के मामले पर एक बार भी अखिलेश की राय जानना जरूरी नहीं समझा। इस मामले को पूरी तरह से दूर ही रखा गया।
मुलायम सिंह को यह अनुमान था कि अगर इस मामले में अखिलेश से राय ली गई तो विलय का यह मामला टल जाएगा।
बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के विलय का मामला मुलायम और अखिलेश, दोनों के लिए ‘नाक’ का सवाल बन गया है। अखिलेश चाहते हैं कि इस पार्टी के विलय को तुरंत खारिज किया जाए। बुधवार को उनके जो भी कार्यक्रम थे, उन्होंने स्थगित कर दिए।
अखिलेश और मुलायम दोनों ने ही इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। वह चाहते हैं कि विलय को रद्द करके वह कड़ा संदेश दें कि उनकी पार्टी अपराधी छवि वाले लोगों से दूर ही रहना चाहेगी। मुलायम सिंह यादव इस मामले को ठंडा करके आराम से फैसला लेना चाहते हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुलायम चाहते हैं कि इस मामले को अभी तूल न दिया जाए। 25 जून को होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में इस बारे में फैसला किया जाए।
इस बीच पार्टी के कद्दावर नेता शिवपाल यादव ने कौएद के सपा में विलय को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि सपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है। सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह की इजाजत के बाद ही अंसारी भाइयों की पार्टी का विलय कराया गया था।
उन्होंने कहा, “सपा में मुलायम ही सर्वेसर्वा हैं। नेताजी का फैसला सबको मंजूर होता है। हमने नेताजी की राय लेकर ही दोनों को पार्टी से जोड़ा है।”
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