उत्तर प्रदेश

जानिये कैसे प्रेम प्रकाश सिंह बना माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी, 17 साल की उम्र में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा

राकेश मिश्रा
लखनऊ: पूर्वांचल की धरती से समय-समय पर ऐसे कई बाहुबली निकले हैं जिनके नाम का खौफ सत्ता के गलियारों तक में फैला। कई ऐसे बाहुबली थे जिन्होंने जुर्म की दुनिया में नाम कमाने के बाद राजनीति का दामन थाम लिया और प्रदेश में मंत्री पद पर भी काबिज रहे। वहीँ कुछ ऐसे भी थे जिन्हे राजनीति का साथ नसीब नहीं हुआ और या तो वो पुलिस एनकाउंटर में ठोक दिए गए या फिर आपसी गैंगवार के शिकार हो गए।

इन्ही में से एक था प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव का निवासी मुन्ना बजरंगी जिसका असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह था। मुन्ना बजरंगी बचपन से ही जुर्म दुनिया में शामिल हो गया था, और जब उस पर पहला मुकदम दर्ज हुआ था, तो उस वक्त वह महज 17 साल का था। इसके बाद वह इलाके के दबंग माफिया गजराज सिंह के लिए काम करने लगा। 80 के दशक में गजराज के इशारे पर ही उसने जौनपुर के बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में सनसनी फैला दी थी।

पूर्वांचल में धाक जमाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। इसके बाद मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा। लेकिन इसी बीच तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी के लिए चुनौती बनने लगे तो मुन्ना बजरंगी ने 2005 में कृष्णानंद राय की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी।

उसने अपने गैंग के साथ लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर एके 47 बंदूक से 400 गोलियां बरसाई थी। इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे। पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां बरामद हुईं थी। इस हत्याकांड से यूपी की सियासत में भूचाल आ गया था और हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा। इसके बाद पुलिस से बचने के लिए वह मुंबई भाग गया था, लेकिन उसका धंधा जारी रहा।

मुन्ना बजरंगी का जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे. मगर प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया। उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। किशोर अवस्था तक आते आते उसे कई ऐसे शौक लग गए जो उसे जुर्म की दुनिया में ले जाने के लिए काफी थे।

मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा. वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया।

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