उत्तर प्रदेश

सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का बसपा सुप्रीमो मायावती ने किया समर्थन

लखनऊ: मोदी सरकार की कैबिनेट में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने के फैसले का बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने स्वागत करते हुए समर्थन किया है। आरक्षण का समर्थन करते हुए मायावती ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया यह फैसला, सही नियत से लिया गया फैसला नहीं है। ये एक राजनीतिक स्टंट और छलावा है।

उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि यह फैसला कार्यकाल खत्म होने से और पहले लिया गया होता। मायावती ने कहा कि अभी आरक्षण को लेकर जो व्यवस्था लागू है, वो काफी पुरानी है।

बता दें, सवर्ण आरक्षण के फैसले से एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण की पुरानी व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। दरअसल, सरकार ने 10 फीसदी ईबीसी (आर्थिक रूप से पिछड़ा) कोटा का प्रस्ताव पेश किया है। मौजूदा समय में सरकारी नौकरियों में फिलहाल 49.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है। इससे अधिक आरक्षण के लिए सरकार को मौजूदा आरक्षण कानून में संशोधन करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी से अधिक आरक्षण पर रोक लगाई है।

कैबिनेट के सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के फैसले से पहले अनुसूचित जाति (एससी) को 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 7.5 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है। कैबिनेट के इस ऐतिहासिक फैसले का लाभ राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार, बनिया सहित आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को मिलेगा। आर्थिक रूप से पिछड़े इन वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण का लाभ दाने के लिए सरकार को अनुच्छेद 15 एवं 16 में स्पेशल क्लॉज जोड़कर संवैधानिक संशोधन करने हों। सरकार इस आरक्षण को लागू करने के लिए मंगलवार को संसद में संशोधन विधेयक पेश करेगी। इसे संसद में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत पेश करेंगे।

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