उत्तर प्रदेश

राज्यसभा चुनाव: यूपी में दोहराया जाएगा गुजरात, या बाजी आएगी भाजपा के हाथ!

राज्यसभा चुनाव: यूपी में दोहराया जाएगा गुजरात, या बाजी आएगी भाजपा के हाथ!

 
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की लड़ाई एक दिलचस्प मोड़ पर आ गयी है। आप सभी को गुजरात में राज्य सभा के चुनाव तो याद होंगे ही। जिसमे तमाम नौटंकी हुई थी। भाजपा की नज़रों से बचाने के लिए कांग्रेस को तो अपने विधायकों को गुजरात से बाहर कर्नाटक में कई दिनों तक सहेज कर रखना पड़ा था। फिर भी कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की जीत चुनाव आयोग के निर्णय के बाद ही तय हो पायी थी। शुक्रवार को प्रदेश में राज्य सभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। यहाँ संख्या बल के हिसाब से भाजपा के 8 और समाजवादी पार्टी के एक विधायक का उच्च सदन में जाना तो निश्चित है। संशय है तो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक उम्मीदवार पर क्योंकि सत्ताधारी दल ने एक निर्दल धनपशु को समर्थन देकर मामला दिलचस्प बना दिया है।

प्रदेश की दो प्रतिष्ठित सीटों गोरखपुर और फूलपुर में मुंह की खाने के बाद भाजपा जहाँ किसी भी कीमत पर 9वी सीट को हथियाना चाहती है तो वहीँ दूसरी तरफ गठबंधन से उत्साहित सपा-बसपा किसी भी कीमत पर वो सीट भाजपा के पाले में जाने से रोकने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा दिया है। शुक्रवार को होने वाले राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और सपा-बसपा के बीच महज एक सीट को लेकर प्रतिष्ठा की लड़ाई है।

क्या है वोटों का गणित

प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के मैदान में कुल 11 उम्मीदवार हैं। राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में बीजेपी की 8 सीट पक्की है, वहीं सपा की नौंवीं सीट पक्की है, जहां से जया बच्चन का जीतना पूरी तरह तय है। असली लड़ाई दसवीं सीट के लिए है। यहां बीजेपी के अनिल अग्रवाल और बसपा के भीमराव अंबेडकर में मुकाबला है। दसवीं सीट के लिए बसपा की ओर से भीमराव अंबेडकर को सपा का समर्थन प्राप्त है।

नियम के मुताबिक सभी राजनीतिक पार्टियों को अपने उम्मीदवारों के लिए विधायकों को अलॉट करना होगा। एक कैंडिडेट को जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी। इस लिहाज से देखा जाए तो यूपी की आठ सीटों पर वोट करने के बाद बीजेपी के पास 8 विधायकों के अतिरिक्त मत बच रहे हैं और उसे जीत के लिए सिर्फ नौ और मतों की जरूरत होगी। यानी अभी बीजेपी के पास 8 विधायक हैं और उसे जीत के लिए 9 और चाहिए।47 विधायकों वाली एसपी 10 वोट बीएसपी को दे सकती है। 19 विधायकों के साथ मायावती को अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए एसपी के 10, कांग्रेस के 7 और आरएलडी के एक विधायक का सहारा है। तीनों ही दलों ने विधानसभा में पहले ही बीएसपी कैंडिडेट के समर्थन का पत्र सौंप दिया है। बसपा को अगर ये सभी वोट कर देते हैं तो लगभग यह जीत के बराबर होगा, मगर बीजेपी इनमें से तोड़ने में कामयाब हो जाती है, तो फिर यह असंभव हो जाएगा।

अब दिलचस्प होगा कि भाजपा प्रदेश से एक अतरिक्त सीट जीत पाती है या फिर यहाँ भी गुजरात वाली कहानी दोहराई जाती है।

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