उत्तर प्रदेश

स्वतंत्र देव सिंह को दी जा सकती है प्रदेश भाजपा की कमान, महेंद्र नाथ बन सकते हैं सिक्किम के राज्यपाल

राकेश मिश्रा
लखनऊ: 2019 में होने वाले आमचुनाव के लगभग 9 महीने पहले ही भाजपा चुनावी मोड में आ चुकी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जहाँ दौरे पर दौरे कर रहे हैं वहीँ प्रदेश भाजपा में भी नेताओं को नयी-नयी जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा प्रदेश में एक और बड़ा परिवर्तन कर सकती है। जानकारी के अनुसार चुनाव से पहले जातीय समीकरण को साधने की कवायद में पार्टी वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और चंदौली से सांसद महेन्द्र नाथ पांडेय को सिक्किम का राज्यपाल बना सकती है। श्री पांडेय की जगह पार्टी सूबे के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बना सकती है।

बता दें कि सिक्किम के वर्तमान राज्यपाल का कार्यकाल 31 जुलाई को समाप्त हो रहा है। सूत्रों के अनुसार सिक्किम के नए राज्यपाल के नाम की घोषणा जुलाई के पहले पखवाड़े में की जा सकती है।

1991 में अपना पहला चुनाव जीत विधान सभा पंहुचने वाले महेंद्र नाथ पांडेय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों के करीबी माने जाते हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले श्री पांडेय केंद्र में मंत्री थे। देवरिया से सांसद कलराज मिश्रा की केंद्रीय मंत्रिमंडल से छुट्टी के बाद ब्राह्मण वोटों को सहेजे रखने के लिए पार्टी ने महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था।

वहीँ स्वतंत्र देव सिंह का नाम 2017 में भाजपा द्वारा बड़ी जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री की दौड़ में भी आया था। उस समय यह माना जा रहा था कि पार्टी में शक्ति संतुलन को साधने और किसी बड़े नेता को नाराज नहीं करने की स्थिति में स्वतंत्र देव सिंह को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि तब ऐसा नहीं हुआ लेकिन अब पार्टी के सामने 2019 में सपा-बसपा जैसा मजबूत गठबंधन सामने आने वाला है, भाजपा किसी पिछड़े नेता को सूबे में पार्टी का प्रमुख बना कर जातीय समीकरण को साधने की कोशिश कर सकती है। स्वतंत्र देव सिंह कुर्मी समाज से आते हैं और उरई के रहने वाले हैं।

13 फरवरी 1964 को मिर्जापुर में जन्मे स्वतन्त्र देव सिंह वर्तमान में सूबे में मंत्री के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामन्त्री भी हैं। संघ की पृष्ठभूमि से आनेवाले स्वतंत्र देव सिंह भाजपा के बड़े जमीनी नेताओं में से एक माने जाते हैं। 1986 में आरएसएस से शुरुआत कर स्वतंत्र देव सिंह ने 1988-89 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में संगठन मन्त्री के रूप में कार्य भार ग्रहण किया। यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की यात्रा प्रारम्भ होती है।

श्री सिंह अपनी कड़ी मेहनत एवं संघर्षशील स्वभाव के कारण संगठन में काफी लोकप्रिय हुए। स्वतंत्र देव सिंह 2001 में भाजपा के युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने। इसके बाद 2004 में विधान परिषद के सदस्य चुने गये तथा इसी वर्ष भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामन्त्री भी बनाये गये।

पीएम मोदी के करीबी स्वतंत्र देव सिंह के बारे में बताया जाता है कि वह विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की रैली को सफल बनाने के लिए शहरों में जाकर वहीं काम जमीन में जुड़कर काम करने लगते थे। उनके पास बूथ से लेकर मंडल स्तर तक के कार्यकर्ताओं की जानकारी हैं।

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