चुनाव लड़ने तक पद पर बने रहेंगे सीएम योगी और मौर्य

गोरखपुर (संदीप त्रिपाठी): हाईकोर्ट के सवाल के बाद राजनीतिक गलियारों पर तमाम चर्चाओं पर विराम। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य अपने-अपने पद पर बने रहेंगे। संविधान के मुताबिक अगले चार महीने में चुनाव लडक़र विधायक अवश्य बन जाएंगे।

राज्य सरकार के अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अतीत के तमाम उदाहरणों के साथ स्पष्ट किया है कि सदन का सदस्य बने बगैर भी छह महीने पद संभालना मुमकिन है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है।

समाजसेवी संजय शर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या मौजूदा वक्त में सांदका वेतन तथा अन्य सुविधाएं हासिल कर रहे हैं। इसके साथ ही योगी और केशव सीएम व डिप्टी सीएम पद पर मिलने वाले लाभ भी उठा रहे हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि सांसद किसी राज्य का मंत्री नहीं बन सकता और यह संविधान के अनुच्छेद 101 (2) का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के समर्थन में संसद (अयोग्यता का निवारण) अधिनियम 1959 के प्रावधानों का हवाला दिया है और आदित्यनाथ के साथ केशव मौर्य की नियुक्ति भी रद्द करने की मांग रखी है। जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस वीरेंद्र कुमार की बेंच ने याचिका को

स्वीकार करते हुए यूपी के एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह की दलील सुनने के बाद अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से राय मांगी है। मामले में अगली सुनवाई 24 मई को होगी।

दरअसल, सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री पद की सुविधाएं लेने के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका पर अदालत ने योगी सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि संविधान की किस शक्ति के जरिए योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य सांसद की सुविधाएं एवं लाभ लेने के साथ-साथ सीएम और डिप्टी सीएम के लाभ भी हासिल कर रहे हैं। इस सवाल के बाद यूपी की सियासत गर्म हो गई है।

योगी सरकार के पहले विधानसभा सत्र के दौरान मुश्किल पैदा करने वाले सवाल ने इस चर्चा को बल दिया है कि हाईकोर्ट सख्त रूख अपनाएगा तो योगी को मुख्यमंत्री पद की कुर्सी से हाथ धोना पड़ेगा। गौरतलब है कि योगी फिलहाल प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ गोरखपुर से सांसद भी हैं। बीते दिनों उन्होंने लोकसभा के सत्र में हिस्सा भी लिया था, लेकिन सांसद पद नहीं छोड़ा।

दूसरी ओर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य इलाहाबाद की फूलपुर संसदीय सीट से निर्वाचित हैं। नियमानुसार सीएम व डिप्टी सीएम को विधानसभा या विधानपरिषद् का सदस्य होना जरूरी है, लेकिन दोनों नेता किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

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